
International Men’s Day हर साल 19 नवंबर को दुनिया भर में मनाया जाता है। 2025 में भी यह दिन पुरुषों की सामाजिक, पारिवारिक और राष्ट्रीय भूमिका को समझने, उनकी चुनौतियों पर चर्चा करने और संतुलित समाज की दिशा में कदम बढ़ाने का मौका देगा। यह केवल एक “celebration day” नहीं है, बल्कि पुरुषों की वास्तविक समस्याओं और मानसिक स्वास्थ्य को पहचानने का गंभीर मंच है।
2025 की तेज-रफ्तार दुनिया में पुरुषों पर बढ़ते दबाव, बदलती पारिवारिक संरचनाएँ, नौकरी की अनिश्चितता, और सामाजिक अपेक्षाओं ने इस दिन को पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण बना दिया है।
International Men’s Day क्या है?
International Men’s Day एक वैश्विक पहल है जिसका उद्देश्य पुरुषों के योगदान को सम्मान देना, उनकी उपलब्धियों को पहचानना और उनके सामने आने वाली मानसिक, सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों पर ध्यान दिलाना है।
इसके छह मुख्य उद्देश्य हैं—
- सकारात्मक पुरुष रोल मॉडल को बढ़ावा देना
- पुरुषों के स्वास्थ्य और कल्याण में सुधार
- परिवार व समाज में पुरुषों के योगदान को पहचानना
- पुरुषों के खिलाफ होने वाली भेदभावपूर्ण सोच को कम करना
- लैंगिक समानता को बढ़ावा देना
- सुरक्षित और बेहतर दुनिया बनाने की दिशा में जागरूकता फैलाना
इन उद्देश्यों से यह साफ है कि International Men’s Day का मकसद पुरुषों को “उपर उठाना” नहीं, बल्कि समाज में संतुलित और न्यायपूर्ण विचार स्थापित करना है।
19 नवंबर को ही क्यों मनाया जाता है?
इस दिन की शुरुआत 1999 में ट्रिनिदाद एंड टोबैगो में हुई थी। 19 नवंबर इसलिए चुना गया क्योंकि यह दिन संतुलन, समानता और पुरुषों के सकारात्मक योगदान को मनाने के लिए उपयुक्त माना गया। धीरे-धीरे इसे विश्वभर के 90+ देशों ने अपनाया और आज यह एक वैश्विक आंदोलन बन चुका है।
2025 में International Men’s Day की थीम
2025 की थीम अधिकांश देशों में “Men’s Well-being and Positive Change” के रूप में चल रही है।
इस थीम का मुख्य उद्देश्य है—
- पुरुषों के मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना
- आत्महत्या दर को कम करना
- कार्यस्थल और परिवार में स्वस्थ माहौल बढ़ाना
- युवा लड़कों में सकारात्मक सोच को बढ़ावा देना
भारत जैसे देशों में पुरुषों के मानसिक स्वास्थ्य पर बातचीत लगभग न के बराबर है, इसलिए यह थीम बेहद प्रासंगिक है।
भारत में International Men’s Day की जरूरत क्यों बढ़ गई है?
सच बोलें तो भारत में पुरुषों की चुनौतियों को अक्सर “मर्द बनो”, “मर्द रोते नहीं” जैसे जुमलों के पीछे दबा दिया जाता है।
यह सोच सीधे-सीधे उनकी मानसिक स्थिति पर असर डालती है।
भारत में तीन बड़ी चुनौतियाँ:
1️⃣ ऊँची आत्महत्या दर
पुरुषों की आत्महत्या दर महिलाओं की तुलना में कई गुना अधिक दर्ज की जाती है।
इसका कारण—
- आर्थिक दबाव
- परिवार की जिम्मेदारियाँ
- भावनाओं को व्यक्त न कर पाना
- काम का तनाव
2️⃣ काम और परिवार का असंतुलन
आज के पुरुष नौकरी, वित्तीय जिम्मेदारी, और परिवार के प्रति अपेक्षाओं के बीच फंसकर जीवन में खुद को खोने लगते हैं।
3️⃣ स्वास्थ्य की अनदेखी
पुरुष आमतौर पर बीमारी को हल्के में लेते हैं।
परिणाम—
- हार्ट डिज़ीज़
- तनाव
- हाई BP
- अनियमित दिनचर्या
International Men’s Day इन सभी समस्याओं को उजागर करने में अहम भूमिका निभाता है।

International Men’s Day 2025: पुरुषों का योगदान
पुरुष समाज की हर संरचना में अहम भूमिका निभाते हैं—
- देश की सुरक्षा
- अर्थव्यवस्था
- शिक्षा
- परिवार का नेतृत्व
- नवाचार और तकनीक
- सामाजिक जिम्मेदारियाँ
लेकिन इन योगदानों पर चर्चा उतनी नहीं होती, जितनी होनी चाहिए।
यह दिन उस कमी को पूरा करने का मौका देता है।
International Men’s Day कैसे मनाया जाता है?
2025 में कई देशों में निम्न तरीके से यह समारोह आयोजित हो रहा है—
- सामाजिक कार्यक्रम
- मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता अभियान
- पुरुषों की हेल्थ चेकअप कैंप
- स्कूल/कॉलेज में संवाद सत्र
- NGOs द्वारा वर्कशॉप
- सोशल मीडिया कैंपेन (#InternationalMensDay)
भारत में भी जागरूकता बढ़ रही है और कई शहरों में पुरुष कल्याण कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं।
पुरुषों के लिए 2025 में सुझाए गए कदम
यदि आप पुरुष हैं, इन बातों को इस वर्ष अपनाएँ—
- मानसिक तनाव पर ध्यान दें
- नियमित हेल्थ चेकअप कराएँ
- परिवार में भावनाओं पर खुलकर बात करें
- शराब, धूम्रपान और अनियमित आदतों से दूरी रखें
- जरूरत पड़े तो प्रोफेशनल हेल्प लेने से न हिचकिचाएँ
आज की दुनिया में “strong” होने का मतलब भावनाएँ दबाना नहीं, बल्कि सचेत और संतुलित होना है।
क्यों International Men’s Day समाज के लिए जरूरी है?
संतुलित समाज वह है जिसमें—
- पुरुषों और महिलाओं, दोनों की समस्याएँ समझी जाएँ
- दोनों के योगदान को समान सम्मान मिले
- मानसिक स्वास्थ्य पर खुलकर बातचीत हो
- जिम्मेदारियाँ बराबरी से बाँटी जाएँ
International Men’s Day इस दिशा में अहम भूमिका निभाता है।
यह सिर्फ पुरुषों का दिन नहीं, एक स्वस्थ समाज की ओर कदम है।
निष्कर्ष
International Men’s Day (19 नवंबर 2025) पुरुषों के योगदान को सम्मान देने और उनकी वास्तविक चुनौतियों को समझने का अवसर है।
भारत में यह दिन बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि यहाँ पुरुषों के मानसिक स्वास्थ्य, पारिवारिक अपेक्षाओं और सामाजिक दबावों पर खुलकर बातचीत अभी भी कम है।
2025 का संदेश साफ है—
“स्वस्थ पुरुष = स्वस्थ परिवार = स्वस्थ समाज।”
FAQs (Google People Also Ask आधारित)
1. International Men’s Day कब मनाया जाता है?
International Men’s Day हर साल 19 नवंबर को दुनिया भर में मनाया जाता है।
2. International Men’s Day क्यों मनाया जाता है?
इस दिन का उद्देश्य पुरुषों के योगदान को पहचानना, मानसिक स्वास्थ्य पर जागरूकता बढ़ाना और लैंगिक संतुलन को सुधारना है।
3. International Men’s Day 2025 की थीम क्या है?
2025 का मुख्य फोकस Men’s Well-being and Positive Change पर आधारित है।
4. भारत में International Men’s Day का महत्व क्या है?
भारत में पुरुषों की मानसिक स्वास्थ्य समस्याएँ, सामाजिक दबाव और आत्महत्या दर इस दिन को बेहद महत्वपूर्ण बनाते हैं।
5. International Men’s Day कैसे मनाया जाता है?
भारत में यह दिन हेल्थ कैंप, मानसिक स्वास्थ्य सेमिनार, सोशल कैंपेन और जागरूकता कार्यक्रमों के साथ मनाया जाता है।